आदि पर्व  अध्याय ९६

वैशम्पाय़न उवाच

स चाश्विरूपसदृशो देवसत्त्वपराक्रमः |  ५६   क
सर्वासामेव नारीणां चित्तप्रमथनोऽभवत् ||  ५६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति