अनुशासन पर्व  अध्याय ९६

अङ्गिरा उवाच

अशुचिर्व्रह्मकूटोऽस्तु श्वानं च परिकर्षतु |  २०   क
व्रह्महानिकृतिश्चास्तु यस्ते हरति पुष्करम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति