अनुशासन पर्व  अध्याय ९६

शुक्र उवाच

पृष्ठमांसं समश्नातु दिवा गच्छतु मैथुनम् |  २४   क
प्रेष्यो भवतु राज्ञश्च यस्ते हरति पुष्करम् ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति