अनुशासन पर्व  अध्याय ९६

पशुसख उवाच

अग्निहोत्रमनादृत्य सुखं स्वपतु स द्विजः |  ४०   क
परिव्राट्कामवृत्तोऽस्तु यस्ते हरति पुष्करम् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति