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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९६
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जनमेजय़ उवाच
एवमेतत्तदा वृत्तं तस्य यज्ञे महात्मनः |  १५   क
पश्यतां चापि नस्तत्र नकुलोऽन्तर्हितस्तदा ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति