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भीष्म पर्व
अध्याय ९६
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सञ्जय़ उवाच
तस्य नान्यं प्रपश्यामि संय़ुगे भेषजं महत् |  २३   क
ऋते त्वां राक्षसश्रेष्ठ सर्वविद्यासु पारगम् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति