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भीष्म पर्व
अध्याय ९६
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सञ्जय़ उवाच
स एवमुक्तो वलवान्राक्षसेन्द्रः प्रतापवान् |  २५   क
प्रय़यौ समरे तूर्णं तव पुत्रस्य शासनात् |  २५   ख
नर्दमानो महानादं प्रावृषीव वलाहकः ||  २५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति