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भीष्म पर्व
अध्याय ९६
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सञ्जय़ उवाच
तां प्रमृद्य ततः सेनां पद्मिनीं वारणो यथा |  ३४   क
ततोऽभिदुद्राव रणे द्रौपदेय़ान्महावलान् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति