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द्रोण पर्व
अध्याय ९६
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सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्वृष्णिशार्दूलस्तथा वाणैः समाहतः |  ३२   क
तानविध्यन्महाराज सर्वानेव त्रिभिस्त्रिभिः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति