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द्रोण पर्व
अध्याय ९६
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सञ्जय़ उवाच
विद्राव्य सर्वसैन्यानि तावकानि समन्ततः |  ४४   क
प्रय़यौ सात्यकी राजञ्श्वेताश्वस्य रथं प्रति ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति