शान्ति पर्व  अध्याय २४७

भीष्म उवाच

दीप्तानलनिभः प्राह भगवान्धूम्रवर्चसे |  २   क
ततोऽहमपि वक्ष्यामि भूय़ः पुत्र निदर्शनम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति