शान्ति पर्व  अध्याय १३७

पूजन्यु उवाच

गृहस्नेहाववद्धानां नराणामल्पमेधसाम् |  ८५   क
कुस्त्री खादति मांसानि माघमा सेगवामिव ||  ८५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति