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अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
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भीष्म उवाच
स विस्फार्य धनुर्दिव्यं गृहीत्वा च वहूञ्शरान् |  १८   क
अतिष्ठत्सूर्यमभितो यतो याति ततोमुखः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति