वन पर्व  अध्याय ९७

लोमश उवाच

धुर्यासनमथासाद्य निषसाद महामुनिः |  ५   क
तं पर्यवेषद्दैत्येन्द्र इल्वलः प्रहसन्निव ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति