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भीष्म पर्व
अध्याय ९७
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धृतराष्ट्र उवाच
आर्श्यशृङ्गिं कथं चापि सौभद्रः परवीरहा |  २   क
तन्ममाचक्ष्व तत्त्वेन यथा वृत्तं स्म संय़ुगे ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति