menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २६५
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
स कल्पवृक्षसदृशो यत्नादपि विभूषितः |  ५   क
श्मशानचैत्यद्रुमवद्भूषितोऽपि भय़ङ्करः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति