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भीष्म पर्व
अध्याय ९७
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सञ्जय़ उवाच
प्रतिलभ्य ततः सञ्ज्ञां द्रोणपुत्रः प्रतापवान् |  ४६   क
वार्ष्णेय़ं समरे क्रुद्धो नाराचेन समर्दय़त् ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति