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द्रोण पर्व
अध्याय ९७
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सञ्जय़ उवाच
ते पुनः संन्यवर्तन्त कृत्वा संशप्तकान्मिथः |  १२   क
परां युद्धे मतिं कृत्वा पुत्रस्य तव शासनात् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति