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शान्ति पर्व
अध्याय १९२
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राजो उवाच
राजाहं व्राह्मणश्च त्वं यदि षट्कर्मसंस्थितः |  ३८   क
ददामि वसु किञ्चित्ते प्रार्थितं तद्वदस्व मे ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति