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अनुशासन पर्व
अध्याय ८१
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श्रीरु उवाच
अप्येकाङ्गे तु वो वस्तुमिच्छामि च सुकुत्सिते |  २०   क
न वोऽस्ति कुत्सितं किञ्चिदङ्गेष्वालक्ष्यतेऽनघाः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति