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शान्ति पर्व
अध्याय १५४
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भीष्म उवाच
ज्ञानारामस्य वुद्धस्य सर्वभूताविरोधिनः |  ३३   क
नावृत्तिभय़मस्तीह परलोके भय़ं कुतः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति