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द्रोण पर्व
अध्याय १५९
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सञ्जय़ उवाच
उत्सारय़न्तः प्रभय़ा तमस्ते चन्द्ररश्मय़ः |  ४५   क
पर्यगच्छञ्शनैः सर्वा दिशः खं च क्षितिं तथा ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति