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उद्योग पर्व
अध्याय ४८
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वैशम्पाय़न उवाच
त्रय़ाणामेव च मतं तत्त्वमेकोऽनुमन्यसे |  २७   क
रामेण चैव शप्तस्य कर्णस्य भरतर्षभ ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति