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वन पर्व
अध्याय २५८
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मार्कण्डेय़ उवाच
पितामहो रावणस्य साक्षाद्देवः प्रजापतिः |  ११   क
स्वय़म्भूः सर्वलोकानां प्रभुः स्रष्टा महातपाः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति