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भीष्म पर्व
अध्याय ९८
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सञ्जय़ उवाच
विषाणे दन्तिनं गृह्य निर्विषाणमथाकरोत् |  ३५   क
विषाणेन च तेनैव कुम्भेऽभ्याहत्य दन्तिनम् |  ३५   ख
पातय़ामास समरे दण्डहस्त इवान्तकः ||  ३५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति