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द्रोण पर्व
अध्याय ९८
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सञ्जय़ उवाच
एकेन सात्वतेनाद्य युध्यमानस्य चानघ |  ११   क
पलाय़ने तव मतिः सङ्ग्रामाद्धि प्रवर्तते ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति