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विराट पर्व
अध्याय २४
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वैशम्पाय़न उवाच
इत्यजल्पन्महाराज परानीकविशातनम् |  ४   क
देशे देशे मनुष्याश्च कीचकं दुष्प्रधर्षणम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति