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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
उद्यम्यात्मानमुग्राय़ कर्मणे धैर्यमास्थिताः |  २५   क
धमन्ति कौरवाः शङ्खान्यस्य वीर्यमुपाश्रिताः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति