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उद्योग पर्व
अध्याय ५१
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धृतराष्ट्र उवाच
यदा ह्यभीक्ष्णं सुवहून्प्रकारा; ञ्श्रोतास्मि तानावसथे कुरूणाम् |  १९   क
तेषां समन्ताच्च तथा रणाग्रे; क्षय़ः किलाय़ं भरतानुपैति ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति