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शान्ति पर्व
अध्याय ९९
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इन्द्र उवाच
वेदी यस्य त्वमित्राणां शिरोभिरवकीर्यते |  ३५   क
अश्वस्कन्धैर्गजस्कन्धैस्तस्य लोका यथा मम ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति