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शान्ति पर्व
अध्याय ९९
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इन्द्र उवाच
यदा तूभय़तो व्यूहो भवत्याकाशमग्रतः |  ३८   क
सास्य वेदी तथा यज्ञे नित्यं वेदास्त्रय़ोऽग्नय़ः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति