menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १६७
chevron_left
chevron_right
अर्जुन उवाच
एवं मे चरतस्तत्र सर्वय़त्नेन शत्रुहन् |  १४   क
प्रीतिमानभवद्वीरो मातलिः शक्रसारथिः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति