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शान्ति पर्व
अध्याय २०४
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गुरुरु उवाच
स्निग्धत्वात्तिलवत्सर्वं चक्रेऽस्मिन्पीड्यते जगत् |  ९   क
तिलपीडैरिवाक्रम्य भोगैरज्ञानसम्भवैः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति