अनुशासन पर्व  अध्याय १४५

वासुदेव उवाच

तत ऊचुर्महात्मानो देवाः सर्वे समागताः |  २६   क
रुद्र रौद्रा भविष्यन्ति पशवः सर्वकर्मसु |  २६   ख
जहि दैत्यान्सह पुरैर्लोकांस्त्राय़स्व मानद ||  २६   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति