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भीष्म पर्व
अध्याय ९९
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सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं ततो विद्ध्वा विराटं च त्रिभिः शरैः |  ५   क
द्रुपदस्य च नाराचं प्रेषय़ामास भारत ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति