chevron_left उद्योग पर्व अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच:
यद्यदिच्छेदय़ं शौरिस्तत्तत्कुर्यादय़त्नतः ||
५० ख
वैशम्पाय़न उवाच:
तं न वुध्यसि गोविन्दं घोरविक्रममच्युतम् |
५१ क
वैशम्पाय़न उवाच:
आशीविषमिव क्रुद्धं तेजोराशिमनिर्जितम् ||
५१ ख
वैशम्पाय़न उवाच:
प्रधर्षय़न्महावाहुं कृष्णमक्लिष्टकारिणम् |
५२ क
वैशम्पाय़न उवाच:
पतङ्गोऽग्निमिवासाद्य सामात्यो न भविष्यसि ||
५२ ख