chevron_left सभा पर्व अध्याय १६
कृष्ण उवाच:
अपृच्छन्नवहेमाभां राक्षसीं तामराक्षसीम् ||
५० ख
कृष्ण उवाच:
का त्वं कमलगर्भाभे मम पुत्रप्रदाय़िनी |
५१ क
कृष्ण उवाच:
कामय़ा व्रूहि कल्याणि देवता प्रतिभासि मे ||
५१ ख