chevron_left आदि पर्व अध्याय १८९
व्यास उवाच:
सैषा देवी रुचिरा देवजुष्टा; पञ्चानामेका स्वकृतेन कर्मणा |
४९ क
व्यास उवाच:
सृष्टा स्वय़ं देवपत्नी स्वय़म्भुवा; श्रुत्वा राजन्द्रुपदेष्टं कुरुष्व ||
४९ ख