दुर्योधन उवाच:
कथं शिखण्डी गाङ्गेय़ कन्या भूत्वा सती तदा |
१ क
दुर्योधन उवाच:
पुरुषोऽभवद्युधि श्रेष्ठ तन्मे व्रूहि पितामह ||
१ ख
भीष्म उवाच:
भार्या तु तस्य राजेन्द्र द्रुपदस्य महीपतेः |
२ क
भीष्म उवाच:
महिषी दय़िता ह्यासीदपुत्रा च विशां पते ||
२ ख
भीष्म उवाच:
एतस्मिन्नेव काले तु द्रुपदो वै महीपतिः |
३ क
भीष्म उवाच:
अपत्यार्थं महाराज तोषय़ामास शङ्करम् ||
३ ख
भीष्म उवाच:
अस्मद्वधार्थं निश्चित्य तपो घोरं समास्थितः |
४ क
भीष्म उवाच:
लेभे कन्यां महादेवात्पुत्रो मे स्यादिति व्रुवन् ||
४ ख
भीष्म उवाच:
भगवन्पुत्रमिच्छामि भीष्मं प्रतिचिकीर्षय़ा |
५ क
भीष्म उवाच:
इत्युक्तो देवदेवेन स्त्रीपुमांस्ते भविष्यति ||
५ ख
भीष्म उवाच:
निवर्तस्व महीपाल नैतज्जात्वन्यथा भवेत् |
६ क
भीष्म उवाच:
स तु गत्वा च नगरं भार्यामिदमुवाच ह ||
६ ख
भीष्म उवाच:
कृतो यत्नो मय़ा देवि पुत्रार्थे तपसा महान् |
७ क
भीष्म उवाच:
कन्या भूत्वा पुमान्भावी इति चोक्तोऽस्मि शम्भुना ||
७ ख
भीष्म उवाच:
पुनः पुनर्याच्यमानो दिष्टमित्यव्रवीच्छिवः |
८ क
भीष्म उवाच:
न तदन्यद्धि भविता भवितव्यं हि तत्तथा ||
८ ख
भीष्म उवाच:
ततः सा निय़ता भूत्वा ऋतुकाले मनस्विनी |
९ क
भीष्म उवाच:
पत्नी द्रुपदराजस्य द्रुपदं संविवेश ह ||
९ ख
भीष्म उवाच:
लेभे गर्भं यथाकालं विधिदृष्टेन हेतुना |
१० क
भीष्म उवाच:
पार्षतात्सा महीपाल यथा मां नारदोऽव्रवीत् ||
१० ख
भीष्म उवाच:
ततो दधार तं गर्भं देवी राजीवलोचना |
११ क
भीष्म उवाच:
तां स राजा प्रिय़ां भार्यां द्रुपदः कुरुनन्दन |
११ ख
भीष्म उवाच:
पुत्रस्नेहान्महावाहुः सुखं पर्यचरत्तदा ||
११ ग
भीष्म उवाच:
अपुत्रस्य ततो राज्ञो द्रुपदस्य महीपतेः |
१२ क
भीष्म उवाच:
कन्यां प्रवररूपां तां प्राजाय़त नराधिप ||
१२ ख
भीष्म उवाच:
अपुत्रस्य तु राज्ञः सा द्रुपदस्य यशस्विनी |
१३ क
भीष्म उवाच:
ख्यापय़ामास राजेन्द्र पुत्रो जातो ममेति वै ||
१३ ख
भीष्म उवाच:
ततः स राजा द्रुपदः प्रच्छन्नाय़ा नराधिप |
१४ क
भीष्म उवाच:
पुत्रवत्पुत्रकार्याणि सर्वाणि समकारय़त् ||
१४ ख
भीष्म उवाच:
रक्षणं चैव मन्त्रस्य महिषी द्रुपदस्य सा |
१५ क
भीष्म उवाच:
चकार सर्वय़त्नेन व्रुवाणा पुत्र इत्युत |
१५ ख
भीष्म उवाच:
न हि तां वेद नगरे कश्चिदन्यत्र पार्षतात् ||
१५ ग
भीष्म उवाच:
श्रद्दधानो हि तद्वाक्यं देवस्याद्भुततेजसः |
१६ क
भीष्म उवाच:
छादय़ामास तां कन्यां पुमानिति च सोऽव्रवीत् ||
१६ ख
भीष्म उवाच:
जातकर्माणि सर्वाणि कारय़ामास पार्थिवः |
१७ क
भीष्म उवाच:
पुंवद्विधानय़ुक्तानि शिखण्डीति च तां विदुः ||
१७ ख
भीष्म उवाच:
अहमेकस्तु चारेण वचनान्नारदस्य च |
१८ क
भीष्म उवाच:
ज्ञातवान्देववाक्येन अम्वाय़ास्तपसा तथा ||
१८ ख