धृतराष्ट्र उवाच:
अहमप्येवमेवैतच्चिन्तय़ामि यथा युवाम् |
१ क
धृतराष्ट्र उवाच:
विवेक्तुं नाहमिच्छामि त्वाकारं विदुरं प्रति ||
१ ख
धृतराष्ट्र उवाच:
अतस्तेषां गुणानेव कीर्तय़ामि विशेषतः |
२ क
धृतराष्ट्र उवाच:
नाववुध्येत विदुरो ममाभिप्राय़मिङ्गितैः ||
२ ख
धृतराष्ट्र उवाच:
यच्च त्वं मन्यसे प्राप्तं तद्व्रूहि त्वं सुय़ोधन |
३ क
धृतराष्ट्र उवाच:
राधेय़ मन्यसे त्वं च यत्प्राप्तं तद्व्रवीहि मे ||
३ ख
दुर्योधन उवाच:
अद्य तान्कुशलैर्विप्रैः सुकृतैराप्तकारिभिः |
४ क
दुर्योधन उवाच:
कुन्तीपुत्रान्भेदय़ामो माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ ||
४ ख
दुर्योधन उवाच:
अथ वा द्रुपदो राजा महद्भिर्वित्तसञ्चय़ैः |
५ क
दुर्योधन उवाच:
पुत्राश्चास्य प्रलोभ्यन्ताममात्याश्चैव सर्वशः ||
५ ख
दुर्योधन उवाच:
परित्यजध्वं राजानं कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम् |
६ क
दुर्योधन उवाच:
अथ तत्रैव वा तेषां निवासं रोचय़न्तु ते ||
६ ख
दुर्योधन उवाच:
इहैषां दोषवद्वासं वर्णय़न्तु पृथक्पृथक् |
७ क
दुर्योधन उवाच:
ते भिद्यमानास्तत्रैव मनः कुर्वन्तु पाण्डवाः ||
७ ख
दुर्योधन उवाच:
अथवा कुशलाः केचिदुपाय़निपुणा नराः |
८ क
दुर्योधन उवाच:
इतरेतरतः पार्थान्भेदय़न्त्वनुरागतः ||
८ ख
दुर्योधन उवाच:
व्युत्थापय़न्तु वा कृष्णां वहुत्वात्सुकरं हि तत् |
९ क
दुर्योधन उवाच:
अथवा पाण्डवांस्तस्यां भेदय़न्तु ततश्च ताम् ||
९ ख
दुर्योधन उवाच:
भीमसेनस्य वा राजन्नुपाय़कुशलैर्नरैः |
१० क
दुर्योधन उवाच:
मृत्युर्विधीय़तां छन्नैः स हि तेषां वलाधिकः ||
१० ख
दुर्योधन उवाच:
तस्मिंस्तु निहते राजन्हतोत्साहा हतौजसः |
११ क
दुर्योधन उवाच:
यतिष्यन्ते न राज्याय़ स हि तेषां व्यपाश्रय़ः ||
११ ख
दुर्योधन उवाच:
अजेय़ो ह्यर्जुनः सङ्ख्ये पृष्ठगोपे वृकोदरे |
१२ क
दुर्योधन उवाच:
तमृते फल्गुनो युद्धे राधेय़स्य न पादभाक् ||
१२ ख
दुर्योधन उवाच:
ते जानमाना दौर्वल्यं भीमसेनमृते महत् |
१३ क
दुर्योधन उवाच:
अस्मान्वलवतो ज्ञात्वा नशिष्यन्त्यवलीय़सः ||
१३ ख
दुर्योधन उवाच:
इहागतेषु पार्थेषु निदेशवशवर्तिषु |
१४ क
दुर्योधन उवाच:
प्रवर्तिष्यामहे राजन्यथाश्रद्धं निवर्हणे ||
१४ ख
दुर्योधन उवाच:
अथवा दर्शनीय़ाभिः प्रमदाभिर्विलोभ्यताम् |
१५ क
दुर्योधन उवाच:
एकैकस्तत्र कौन्तेय़स्ततः कृष्णा विरज्यताम् ||
१५ ख
दुर्योधन उवाच:
प्रेष्यतां वापि राधेय़स्तेषामागमनाय़ वै |
१६ क
दुर्योधन उवाच:
ते लोप्त्रहारैः सन्धाय़ वध्यन्तामाप्तकारिभिः ||
१६ ख
दुर्योधन उवाच:
एतेषामभ्युपाय़ानां यस्ते निर्दोषवान्मतः |
१७ क
दुर्योधन उवाच:
तस्य प्रय़ोगमातिष्ठ पुरा कालोऽतिवर्तते ||
१७ ख
दुर्योधन उवाच:
यावच्चाकृतविश्वासा द्रुपदे पार्थिवर्षभे |
१८ क
दुर्योधन उवाच:
तावदेवाद्य ते शक्या न शक्यास्तु ततः परम् ||
१८ ख
दुर्योधन उवाच:
एषा मम मतिस्तात निग्रहाय़ प्रवर्तते |
१९ क
दुर्योधन उवाच:
साधु वा यदि वासाधु किं वा राधेय़ मन्यसे ||
१९ ख