chevron_left वन पर्व अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच:
युधिष्ठिरस्तु विप्रांस्ताननुमान्य महामनाः |
५१ क
वैशम्पाय़न उवाच:
शशास पुरुषान्काले रथान्योजय़तेति ह ||
५१ ख