दुर्योधन उवाच:
तं मत्तमिव मातङ्गं तलशव्देन मानवाः |
५१ क
दुर्योधन उवाच:
भूय़ः संहर्षय़ामासू राजन्दुर्योधनं नृपम् ||
५१ ख
दुर्योधन उवाच:
वृंहन्ति कुञ्जरास्तत्र हय़ा हेषन्ति चासकृत् |
५२ क
दुर्योधन उवाच:
शस्त्राणि सम्प्रदीप्यन्ते पाण्डवानां जय़ैषिणाम् ||
५२ ख