chevron_left द्रोण पर्व अध्याय ८६
युधिष्ठिर उवाच:
विश्रव्धो गच्छ शैनेय़ मा कार्षीर्मय़ि सम्भ्रमम् |
५० क
युधिष्ठिर उवाच:
धृष्टद्युम्नो रणे क्रुद्धो द्रोणमावारय़िष्यति ||
५० ख