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कर्णं
कर्णं
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कर्णः
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कर्णश्च
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कर्णस्य
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कर्णे
कर्णेन
कर्णो
कर्णो
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कर्तुं
कर्तुं
कर्तुमर्हसि
कर्दमिनीं
कर्म
कर्म
कर्म
कर्म
कर्म
कर्म
कर्मणः
कर्मणा
कर्मणा
कर्मणा
कर्मणामिह
कर्मणोर्द्वय़ोः
कर्मभिः
कर्मवद्धं;
कर्मसु
कर्माणि
कर्माण्यपि
कर्मेन्द्रिय़ाणि
कर्षन्ती
कलशं
कलामष्टादशीं
कलिङ्गैः
कलेवरम्
कल्पाय़ुतशतं
कल्यमुदारवीर्यं;
कल्याणि
कल्याणे
कवचानि
कवन्धैः
कशाप्रहाराभिहतस्ततः
कश्चन
कश्चित्कुतो
कश्चित्सात्यकेरभवत्प्रभो
कश्चिदिति
कश्चिद्युधि
कश्चिन्महामुने
कश्यपश्च
कष्टानि
कस्माच्छोचसि
कस्माद्रोदिषि
कस्मिन्काले
कस्य
कस्यचित्त्वथ
कस्यैष
का
कांस्यदोहनाम्
काको
काङ्क्षे
काञ्चनभूषणाः
काञ्चनापीडा
काद्रवेय़ा
कान्तं
कापुरुषो
कामं
कामः
कामगं
कामद्वेषविवर्जिताः
काममेतद्ददानि
कामश्च
कामात्क्रोधाद्भय़ाल्लोभाद्दैन्यादानार्यकात्तथा
कामान्धर्मज्ञ
कामिनीनाम्
कामो
काम्वोजराजो
कामय़ानय़ा
कारणं
कारणम्
कारणैस्तस्य
कार्त्तिकस्य
कार्पासिकनिवासिनाम्
कार्मुकासिगदाधराः
कार्यं
कार्यं
कार्यः
कार्यमिति
कार्या
कार्याणि
कार्येषु
कार्ष्णिं
कारय़िष्यति
कालं
कालः
कालखञ्जानसुरान्समेतान्
कालधर्ममवाप्य
कालमूलमिदं
कालसम्पक्वाः
कालस्य
कालान्तकवपुः
काले
काले
काले
कालेन
कालेनाद्भुतकर्मणा
कालो
कालोऽय़मागतः
काव्येनोशनसा
काश्चित्प्रहृष्टा
काश्यश्च
काष्ठानां
काय़ाद्धर्तुमैच्छत्पतत्रिवत्
किं
किं
किं
किं
किं
किं
किं
किं
किं
किं
किं
किंलक्षणो
किङ्कुलीनैर्वा
किञ्चन
किञ्चित्कार्यं
किञ्चित्प्ररोहति
किञ्चिदप्रिय़ं
किञ्चिदुवाचैनं
किञ्चिद्विरूपोऽय़ं
किन्दाने
किमन्नाद्येन
किमर्थं
किमस्माकं
किमिदं
किमुताद्य
किरञ्शरशतान्वहून्
किरीटं
किरीटिना
किर्मीरः
किल
किल्विषमात्मना
कीचकः
कीटय़ोनिना
कीर्तिं
कीर्तिताः
कीर्तिर्हि
कीर्तय़न्ति
कुचेलमसहाय़ता
कुञ्जरानश्वान्पदातींश्चावमर्दितान्
कुडवं
कुण्डलिनो
कुण्डिकां
कुतः
कुतो
कुथाः
कुन्ती
कुन्तीपुत्रं
कुन्तीपुत्रो
कुन्त्या
कुपितो
कुमारमवहन्रणे
कुमारैः
कुम्भेषु
कुरवः
कुरवो
कुरु
कुरु
कुरुकुलोद्वहः
कुरुजाङ्गलम्
कुरुते
कुरुधनानि
कुरुनन्दन
कुरुपाण्डवसेनय़ोः
कुरुपुङ्गवाः
कुरुभिर्हि
कुरुराजोऽपि
कुरुशार्दूल
कुरुषु
कुरुसंसदि
कुरुसेनामहारथैः
कुरूणां
कुरूणां;
कुरूद्वह
कुरून्सर्वानभिय़ातो
कुर्यात्किं
कुर्याद्यथा
कुर्युर्न
कुर्वते
कुर्वन्ति
कुर्वन्वसेत्सदा
कुर्वाणो
कुलं
कुलजौ
कुलवंशस्य
कुलाङ्गारः
कुले
कुले
कुवुद्धय़ः
कुशलं
कुशला
कुशलो
कुशेष्वथ
कूटशाल्मलिना
कूर्मस्त्रिय़ोजनोत्सेधो
कृच्छ्रां
कृतं
कृतं
कृतं
कृतः
कृतकामः
कृतघ्न;
कृतदारः
कृतप्रतिकृतं
कृतमुग्रेण
कृतम्
कृतवन्तस्ते
कृतवर्मा
कृतवर्माणमष्टभिः
कृतवान्पाण्डवैः
कृतवैरौ
कृतहस्तताम्
कृताः
कृताञ्जलिपुटाः
कृतानि
कृतार्थो
कृतास्त्रो
कृते
कृते
कृतोत्साहा
कृत्यं
कृत्ये
कृत्वा
कृत्वा
कृत्वा
कृत्वा
कृत्वा
कृत्वा
कृत्वा
कृत्वा
कृत्वानाथान्परो
कृत्स्नं
कृत्स्नस्तु
कृत्स्नान्सर्वानभिप्राय़ान्प्राप्स्यामः
कृथाः
कृपं
कृपणं
कृपणो
कृपश्चैव
कृपाय़ेत
कृमिकीटविहङ्गमाः
कृशभृत्यं
कृषिभागी
कृष्ण
कृष्ण
कृष्णं
कृष्णः
कृष्णद्वैपाय़नोऽव्रवीत्
कृष्णमाराधय़
कृष्णसहाय़ेन
कृष्णस्य
कृष्णा
कृष्णाकटाक्षेण
कृष्णार्जुनाभ्यां
कृष्णे
कृष्णेन
कृष्णो
कृष्णय़ा
के
केकय़स्य
केकय़ैरपि
केचित्तान्युनक्ति
केचिदार्तस्वरं
केचिद्विसूता
केतुं
केन
केन
केनापि
केवलमर्त्यो
केवलीभूतः
केशव
केशवः
केशवश्चार्जुनश्च
केशवे
केशान्सुशुभान्भूषणान्यवमुच्य
केसरिणः
कैतव्यो
को
को
को
कोटीर्दश
कोपस्तव
कोल्लगिरिं
कोशे
कोऽन्यो
कौतूहलं
कौन्तेय़
कौन्तेय़
कौन्तेय़
कौन्तेय़ः
कौन्तेय़ानामनुलोमौ
कौन्तेय़ो
कौरव
कौरवनन्दनाः
कौरवाः
कौरवाणाम्
कौरवेन्द्रो
कौरव्य
कौरव्य
कौरव्यममितौजसम्
कौवेरं
कौश्यं
क्रतुना
क्रतुय़ाजिनाम्
क्रमेण
क्राथः
क्रिय़तामिति
क्रिय़ा
क्रिय़ामन्त्रैश्च
क्रीडनकैरिव
क्रुद्धं
क्रुद्धः
क्रुद्धः
क्रुद्धस्य
क्रुद्धान्संशमय़न्ति
क्रुद्धो
क्रुद्धो
क्रुद्धोऽनुपश्यति
क्रूरः
क्रूरे
क्रोधः
क्रोधमूर्छितः
क्रोधश्च
क्रोधाच्छालस्कन्धममित्रजित्
क्रोधिते
क्रोशतीनाम्
क्रौञ्चस्तेन
क्लिश्यमानाश्च
क्लेशभय़ावृतम्
क्व
क्व
क्वचित्
क्वचित्क्वचिदलङ्कृतम्
क्षणम्
क्षणेनाथ
क्षत्तर्धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः
क्षत्रं
क्षत्रधर्ममनुस्मर
क्षत्रधर्मेण
क्षत्रादेवं
क्षत्रिय़मर्दनः
क्षत्रिय़स्य
क्षत्रिय़ा
क्षत्रिय़ाणां
क्षत्रिय़ाश्च
क्षत्रिय़ो
क्षन्तव्यं
क्षम
क्षमा
क्षमावन्तो
क्षरं
क्षात्रे
क्षिताविह
क्षितौ
क्षिप्यन्ते
क्षिप्रं
क्षिप्रं
क्षिप्रमिहात्यगाद्वै
क्षीणमांसैर्विरुधिरैर्विमज्जान्त्रैर्विसन्धिभिः
क्षीरविक्रय़िकाश्चैव
क्षुत्पिपासाश्रमान्वितः
क्षुद्रमृगा
क्षुधाम्
क्षुरनेमिनाद्य;
क्षुरेण
क्षेत्रज्ञः
क्षेत्रे
क्षेमधूर्तिः
क्षौमसंवृताम्
क्षय़ः
क्षय़ोदय़ः
क्षेत्रज्ञः
वन पर्व
अध्याय १३
१५ क
visibility
क्षेत्रज्ञः
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
११ ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
१२ ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
४२ क
visibility
क्षेत्रज्ञः
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
८९ ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
१८ क
visibility
क्षेत्रज्ञः
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
९ ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
३४ ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
३६ ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
४० ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४७
१६ ख
visibility
क्षेत्रज्ञः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
२ ख
visibility
क्षेत्रज्ञदर्शिनः
अनुशासन पर्व
अध्याय १११
१३ ख
visibility
क्षेत्रज्ञभावनः
वन पर्व
अध्याय १७८
२३ ख
visibility
क्षेत्रज्ञभूतां
वन पर्व
अध्याय १८४
१६ क
visibility
क्षेत्रज्ञमासीनं
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
३३ ख
visibility
क्षेत्रज्ञमिति
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
४ क
visibility
क्षेत्रज्ञमेवानुय़ाति
शान्ति पर्व
अध्याय २०४
१३ ख
visibility
क्षेत्रज्ञलक्षणाः
शान्ति पर्व
अध्याय २०६
८ क
visibility
क्षेत्रज्ञवित्पार्थिव
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
१०७ ख
visibility
क्षेत्रज्ञशीलनात्
शान्ति पर्व
अध्याय २६६
६ क
visibility
क्षेत्रज्ञश्चेति
शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
२९ क
visibility
क्षेत्रज्ञसङ्क्षय़े
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
१० क
visibility
क्षेत्रज्ञसञ्ज्ञितम्
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
४० क
visibility
क्षेत्रज्ञसत्त्वय़ोरैक्यमित्येतन्नोपपद्यते
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
९ ख
visibility
क्षेत्रज्ञस्तानि
शान्ति पर्व
अध्याय १९६
५ ख
visibility
क्षेत्रज्ञस्तैः
शान्ति पर्व
अध्याय २३८
१ क
visibility
क्षेत्रज्ञस्तैस्तु
शान्ति पर्व
अध्याय २६७
१५ ख
visibility
क्षेत्रज्ञस्त्वनुतिष्ठति
शान्ति पर्व
अध्याय २४१
१ क
visibility
क्षेत्रज्ञस्त्वमृषिष्टुतः
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
४० ख
visibility
क्षेत्रज्ञस्य
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
४३ क
visibility
क्षेत्रज्ञादेव
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
१० ख
visibility
क्षेत्रज्ञाधिष्ठितं
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
८१ ख
visibility
क्षेत्रज्ञाधिष्ठितं
शान्ति पर्व
अध्याय २०४
८ ख
visibility
क्षेत्रज्ञाधिष्ठितो
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
१० ख
visibility
क्षेत्रज्ञानपरिक्षय़े
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
१८ क
visibility
क्षेत्रज्ञे
शान्ति पर्व
अध्याय ४६
४ ख
visibility
क्षेत्रज्ञेनानुदर्शितम्
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
२५ ख
visibility
क्षेत्रज्ञेनानुदर्शिनः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २६
१८ ख
visibility
क्षेत्रज्ञेनानुदर्शिना
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
२८ ख
visibility
क्षेत्रज्ञो
आदि पर्व
अध्याय ६८
३० ख
visibility
क्षेत्रज्ञो
शान्ति पर्व
अध्याय २६७
१६ ख
visibility
क्षेत्रज्ञो
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
२७ क
visibility
क्षेत्रज्ञो
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
५४ क
visibility
क्षेत्रज्ञो
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
३४ क
visibility
क्षेत्रज्ञो
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
१० ख
visibility
क्षेत्रज्ञो
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
३ ख
visibility
क्षेत्रज्ञोऽक्षर
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
१५ ख
visibility
क्षेत्रज्ञोऽत्राधिदैवतम्
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
१३ ख
visibility
क्षेत्रज्ञोऽन्यः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
१० ख
visibility
क्षेत्रज्ञोऽपि
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
१६ ख
visibility
क्षेत्रनिःसृतः
वन पर्व
अध्याय १७८
२० ख
visibility
क्षेत्रनिर्दाता
शान्ति पर्व
अध्याय ९८
६ क
visibility
क्षेत्रभूतास्ता
शान्ति पर्व
अध्याय २०६
८ क
visibility
क्षेत्रभूते
वन पर्व
अध्याय ३
७ क
visibility
क्षेत्रभूमिं
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
३० क
visibility
क्षेत्रमच्युताः
सभा पर्व
अध्याय १८
२९ ख
visibility
क्षेत्रमध्यात्मचिन्तकाः
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
४० क
visibility
क्षेत्रमन्यस्य
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
१४ क
visibility
क्षेत्रमव्यक्तमित्युक्तं
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
३८ ख
visibility
क्षेत्रमात्मानमसर्गः
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
४७ क
visibility
क्षेत्रमासाद्य
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
६ क
visibility
क्षेत्रमाहुर्हि
शान्ति पर्व
अध्याय २११
३२ क
visibility
क्षेत्रमित्यभिधीय़ते
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
१ क
visibility
क्षेत्रमित्युक्तं
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
४० क
visibility
क्षेत्रमुच्यते
शान्ति पर्व
अध्याय २९
८३ ख
visibility
क्षेत्रमुद्दिष्टं
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
३५ क
visibility
क्षेत्रमुप्तं
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
७ क
visibility
क्षेत्रमेकदा
शान्ति पर्व
अध्याय ९८
६ क
visibility
क्षेत्रमेतन्महात्मनः
वन पर्व
अध्याय १२९
२२ ख
visibility
क्षेत्रमेतन्महात्मना
शल्य पर्व
अध्याय ५२
३ क
visibility
क्षेत्रमेव
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
६ ख
visibility
क्षेत्रवित्
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
९ ख
visibility
क्षेत्रविदं
शान्ति पर्व
अध्याय १८०
२५ ख
visibility
क्षेत्रविदो
वन पर्व
अध्याय २०३
३३ ख
visibility
क्षेत्रविदो
शान्ति पर्व
अध्याय २३३
२० ख
visibility
क्षेत्रविशेषं
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
३ क
visibility
क्षेत्रवीजसमाय़ोगात्ततः
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
८ ख
visibility
क्षेत्रसञ्ज्ञकः
शान्ति पर्व
अध्याय २४४
११ ख
visibility
क्षेत्रसञ्ज्ञितम्
वन पर्व
अध्याय ३१
३० क
visibility
क्षेत्रस्थेषु
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
३६ क
visibility
क्षेत्रस्वामिनो
अनुशासन पर्व
अध्याय ४९
१५ ख
visibility
क्षेत्राणां
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
९८ क
visibility
क्षेत्राणामिति
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
३६ ख
visibility
क्षेत्राणि
विराट पर्व
अध्याय ५
५ ख
visibility
क्षेत्राणि
शान्ति पर्व
अध्याय १२
२८ ख
visibility
क्षेत्राणि
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
८६ क
visibility
क्षेत्राणि
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
३ क
visibility
क्षेत्राणि
शान्ति पर्व
अध्याय ३३९
६ क
visibility
क्षेत्राण्यथ
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
४ ख
visibility
क्षेत्रात्मने
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
३३ ख
visibility
क्षेत्रादप्युदकं
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
१४ क
visibility
क्षेत्राद्वनाद्वा
वन पर्व
अध्याय २२२
२४ क
visibility
क्षेत्रापणगृहासक्तं
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
२० ख
visibility
क्षेत्री
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
३३ ख
visibility
क्षेत्री
शान्ति पर्व
अध्याय २६७
३३ ख
visibility
क्षेत्रे
आदि पर्व
अध्याय १
५४ क
visibility
क्षेत्रे
आदि पर्व
अध्याय ५७
९५ ख
visibility
क्षेत्रे
आदि पर्व
अध्याय ५८
२५ ख
visibility
क्षेत्रे
आदि पर्व
अध्याय १००
३० क
visibility