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तत्राभूदुदपानः
स्त्री पर्व
अध्याय ५
१० क
तत्राभूद्विस्मय़ो
शल्य पर्व
अध्याय ५६
४४ ख
तत्राभ्यगच्छद्देवेन्द्रो
वन पर्व
अध्याय २१३
३७ ख
तत्राभ्यगच्छन्मारीचं
वन पर्व
अध्याय २६१
५५ क
तत्राभ्यतिक्रान्त
सभा पर्व
अध्याय ३४
३ ख
तत्राभ्यधिकः
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
३४ ख
तत्राभ्यधिकमालक्ष्य
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
४३ क
तत्राभ्यवेक्षामः
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
२६ ख
तत्रामरवरस्त्रीभिर्मोदते
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
८३ क
तत्रामृतरसं
वन पर्व
अध्याय १५१
४ क
तत्रारण्यकशास्त्राणि
शान्ति पर्व
अध्याय ६१
५ क
तत्रारावो
द्रोण पर्व
अध्याय २१
२९ क
तत्रारावो
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
२० क
तत्रारोहेत
वन पर्व
अध्याय ८२
२१ ख
तत्रार्चितो
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
३३ क
तत्रार्चितो
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८४
४ क
तत्रार्चय़ित्वा
वन पर्व
अध्याय ८२
८८ ख
तत्रार्जुनं
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
१० ख
तत्रार्जुनः
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
४९ क
तत्रार्जुनरथं
उद्योग पर्व
अध्याय १५९
११ ख
तत्रार्जुनस्याग्र्यधनुर्धरस्य;
वन पर्व
अध्याय ११८
५ क
तत्रार्जुनस्याथ
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
१६ क
तत्रार्जुनो
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
२८ क
तत्रार्जुनो
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
३६ क
तत्रालसा
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
१२ क
तत्राल्पेनैव
वन पर्व
अध्याय ८७
१० ग
तत्रावगाढः
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
१९ क
तत्रावतस्थिरे
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
८५ ख
तत्रावतस्थिरे
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
२ क
तत्रावतस्थे
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
७ क
तत्रावधीन्महावाहुः
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
४६ ख
तत्रावसं
आदि पर्व
अध्याय ८४
१३ ख
तत्रावसं
आदि पर्व
अध्याय ८४
१५ ख
तत्रावसं
अनुशासन पर्व
अध्याय १०४
९ क
तत्रावसत्सोऽथ
शान्ति पर्व
अध्याय १६२
३४ ख
तत्रावसन्वहून्कालान्भारता
आदि पर्व
अध्याय ८९
३५ ग
तत्रावहद्यत्र
वन पर्व
अध्याय १९१
५ क
तत्रावहारं
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
४१ क
तत्रावाप्य
शल्य पर्व
अध्याय ३४
८० ख
तत्रावाप्स्यसि
आदि पर्व
अध्याय ७९
१९ ख
तत्रावेक्ष्य
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
५ क
तत्रावैक्षन्त
द्रोण पर्व
अध्याय १११
३३ क
तत्रावोचन्विमनसो
कर्ण पर्व
अध्याय १८
४४ क
तत्राव्यक्तमय़ीं
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
२७ ख
तत्राव्रुवन्केचिद्वातिकास्तं
वन पर्व
अध्याय २४३
४ क
तत्राव्रुवन्केचिद्विषमौ
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
१३ ख
तत्राव्रुवन्नागा
आदि पर्व
अध्याय ३३
११ क
तत्राशरीरकम्
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
४६ ख
तत्राशु
आदि पर्व
अध्याय २०९
१८ क
तत्राश्चर्यं
आदि पर्व
अध्याय १८१
२५ क
तत्राश्चर्यमपश्याम
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
७ क
तत्राश्चर्यमपश्याम
शल्य पर्व
अध्याय ८
४० क
तत्राश्चर्यमपश्याम
शल्य पर्व
अध्याय १३
४४ क
तत्राश्चर्यमभूद्युद्धं
शल्य पर्व
अध्याय २०
५ क
तत्राश्नुते
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
११९ क
तत्राश्मचूर्णमपतत्पावकप्रकरा
वन पर्व
अध्याय १६८
३ ख
तत्राश्रमपदं
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
२५ ख
तत्राश्रमपदं
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
६ क
तत्राश्रमपदं
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
३२ क
तत्राश्रमपदं
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २५
९ क
तत्राश्रमपदे
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
४३ क
तत्राश्रमवरो
वन पर्व
अध्याय ८५
१५ क
तत्राश्रमे
वन पर्व
अध्याय २७९
२२ क
तत्राश्रमो
वन पर्व
अध्याय ८०
७५ क
तत्राश्रमो
वन पर्व
अध्याय ८२
१२१ क
तत्राश्रौषं
वन पर्व
अध्याय ११
१३ क
तत्राश्रौषं
वन पर्व
अध्याय २१
१५ क
तत्राश्रौषमहं
वन पर्व
अध्याय १२
७४ क
तत्राश्रौषमहं
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
३७ क
तत्राश्वतरीसहस्रं;
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
१० ख
तत्राश्वमेधः
उद्योग पर्व
अध्याय १३
१६ क
तत्राश्वसीत
अनुशासन पर्व
अध्याय १५०
१ ख
तत्रासञ्शिल्पिनः
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
७८ क
तत्रासतस्तस्य
शान्ति पर्व
अध्याय ३३८
११ क
तत्रासनानि
आदि पर्व
अध्याय १३२
१४ क
तत्रासनेषु
वन पर्व
अध्याय ५४
४ क
तत्रासन्कुसुमान्यपराण्यपि
अनुशासन पर्व
अध्याय ४२
१४ ख
तत्रासन्पन्नगा
आदि पर्व
अध्याय ५३
१८ क
तत्रासन्प्रय़ुतान्यर्वुदानि
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
१३४ क
तत्रासन्यानि
वन पर्व
अध्याय १२४
७ ख
तत्रासन्युधिष्ठिर
शान्ति पर्व
अध्याय २५
२ ख
तत्रासन्विविधानि
आदि पर्व
अध्याय २१६
१४ क
तत्रासन्संसक्तानि
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
३ क
तत्रासन्समागताः
आदि पर्व
अध्याय ५३
११ क
तत्रासन्समागताः
आदि पर्व
अध्याय १८१
३४ ख
तत्रासन्समागताः
वन पर्व
अध्याय १२
७४ ख
तत्रासन्समागताः
कर्ण पर्व
अध्याय २८
१९ क
तत्रासन्समागताः
कर्ण पर्व
अध्याय २८
३० क
तत्रासन्समागताः
शल्य पर्व
अध्याय ५५
४० ख
तत्रासन्समागताः
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
१ ख
तत्रासन्समानीतास्ते
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
१८ क
तत्रासन्सुमनोभिरलङ्कृताः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६९
१६ क
तत्रासन्स्वय़ंवरदिदृक्षवः
आदि पर्व
अध्याय ९६
४० क
तत्राससादातिवलं
वन पर्व
अध्याय १७४
१८ क
तत्रासां
शल्य पर्व
अध्याय २९
६६ ख
तत्रासीच्छरवृष्टिभिरम्वरे
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
४९ क
तत्रासीच्छापकाले
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
५१ क
तत्रासीच्छापकाले
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
८ क
तत्रासीत्तु
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६४
१५ क
तत्रासीत्तुमुलं
वन पर्व
अध्याय १३
९६ क