ततोऽपश्यत्पितरं
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
९ क
ततोऽपश्यत्स
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
४६ क
ततोऽपश्यत्सव्यसाची
वन पर्व
अध्याय ३८
३१ क
ततोऽपश्यत्सुरम्ये
शान्ति पर्व
अध्याय १६३
११ क
ततोऽपश्यत्सुविस्तीर्णं
शान्ति पर्व
अध्याय १४५
४ क
ततोऽपश्यत्स्थितं
वन पर्व
अध्याय ४३
३६ क
ततोऽपश्यत्स्वसारं
सभा पर्व
अध्याय १२
३२ ख
ततोऽपश्यद्गतं
शल्य पर्व
अध्याय ४९
१५ ख
ततोऽपश्यद्देवराजं
वन पर्व
अध्याय ४४
१५ ख
ततोऽपश्यद्विदुरं
वन पर्व
अध्याय ६
७ क
ततोऽपश्यन्भूमिपा
सभा पर्व
अध्याय ३१
२४ क
ततोऽपानः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २४
८ ख
ततोऽपाय़ाद्रथेनैव
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
५१ ख
ततोऽपाय़ान्नृपस्तत्र
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
४९ क
ततोऽपि
शान्ति पर्व
अध्याय १४६
१७ ख
ततोऽपृच्छद्धनञ्जय़ः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८१
१७ ख
ततोऽपृच्छन्वृत्तान्तं
वन पर्व
अध्याय ५३
१३ ख
ततोऽप्रतिहतं
वन पर्व
अध्याय २३
२८ क
ततोऽप्रहृष्टः
द्रोण पर्व
अध्याय ११६
२६ क
ततोऽप्रीतस्तथोक्तः
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
९ क
ततोऽपय़ाताः
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
१ क
ततोऽभवच्चतुर्मूर्तिः
शल्य पर्व
अध्याय ४३
३७ क
ततोऽभवत्
आदि पर्व
अध्याय २१३
७६ ख
ततोऽभवत्
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
१७ क
ततोऽभवत्
अनुशासन पर्व
अध्याय १४०
२४ क
ततोऽभवत्तम
वन पर्व
अध्याय २१
३४ क
ततोऽभवत्तमो
शल्य पर्व
अध्याय २२
४८ क
ततोऽभवत्तस्य
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
३८ ख
ततोऽभवत्तिमिरघनैरिवावृतं;
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
४० क
ततोऽभवत्पुनः
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
३८ क
ततोऽभवत्पुनर्युद्धं
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
१०७ क
ततोऽभवद्युद्धमतीव
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
२७ क
ततोऽभवन्महद्युद्धं
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
१९ क
ततोऽभवन्महाराज
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
११ क
ततोऽभवन्महाशव्दस्तुमुलो
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
२६ क
ततोऽभवन्महाशव्दो
द्रोण पर्व
अध्याय १५
३९ क
ततोऽभिगम्य
आदि पर्व
अध्याय ९९
४४ ख
ततोऽभिगम्य
आदि पर्व
अध्याय २१३
१९ क
ततोऽभिगम्य
वन पर्व
अध्याय ४४
१९ क
ततोऽभिगम्य
वन पर्व
अध्याय २७८
२ क
ततोऽभिजग्मुः
वन पर्व
अध्याय १७४
२२ क
ततोऽभिजग्मुः
उद्योग पर्व
अध्याय १
१ ख
ततोऽभिजघ्नुः
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
६७ क
ततोऽभितुष्टुवुः
द्रोण पर्व
अध्याय १५
५० ख
ततोऽभिदुद्राव
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
३४ ख
ततोऽभिनद्वहुभिः
कर्ण पर्व
अध्याय ६१
२ क
ततोऽभिपततां
वन पर्व
अध्याय २६९
३ क
ततोऽभिपत्य
वन पर्व
अध्याय २७१
७ क
ततोऽभिपत्य
द्रोण पर्व
अध्याय १६९
४२ क
ततोऽभिपातं
कर्ण पर्व
अध्याय ५४
७ क
ततोऽभिपूज्य
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
६२ क
ततोऽभिपेतुर्वहवो
विराट पर्व
अध्याय ५५
२१ क
ततोऽभिभूतं
कर्ण पर्व
अध्याय ४७
८ क
ततोऽभिमन्युः
वन पर्व
अध्याय १२०
२० क
ततोऽभिमन्युः
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
५ क
ततोऽभिमन्युः
द्रोण पर्व
अध्याय ३६
२० क
ततोऽभिमन्युस्तां
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
८ क
ततोऽभिरूपान्भीष्माय़
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २०
२ क
ततोऽभिवदतां
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
३७ क
ततोऽभिवाद्य
आदि पर्व
अध्याय २०९
१२ क
ततोऽभिवाद्य
वन पर्व
अध्याय ९७
११ क
ततोऽभिवाद्य
वन पर्व
अध्याय २८३
९ क
ततोऽभिवाद्य
स्त्री पर्व
अध्याय ११
११ क
ततोऽभिवाद्य
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
३४ क
ततोऽभिवादय़ामास
वन पर्व
अध्याय ७६
२ क
ततोऽभिवीक्ष्याप्रतिमप्रभाव;
भीष्म पर्व
अध्याय ८१
३२ क
ततोऽभिषिषिचुः
वन पर्व
अध्याय २८३
११ क
ततोऽभिषिषिचुस्तूर्णं
कर्ण पर्व
अध्याय ६
३६ क
ततोऽभिषेकसम्भारान्सर्वान्सम्भृत्य
शल्य पर्व
अध्याय ४४
१ क
ततोऽभिषेचनीय़ेऽह्नि
सभा पर्व
अध्याय ३३
१ क
ततोऽभिसृत्य
वन पर्व
अध्याय २८२
६ क
ततोऽभिय़ाय़
द्रोण पर्व
अध्याय १३
४६ क
ततोऽभूद्द्विपदां
भीष्म पर्व
अध्याय ५२
१७ क
ततोऽभून्निनदो
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
२० ख
ततोऽभ्यगच्छत्सहसा
आदि पर्व
अध्याय २२४
२० क
ततोऽभ्यगच्छन्देवांश्च
शान्ति पर्व
अध्याय २८३
१३ ख
ततोऽभ्यगच्छन्सहिताः
वन पर्व
अध्याय १०२
२१ क
ततोऽभ्यचोदय़त्कृष्णो
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
१ क
ततोऽभ्यधावंस्त्वरिताः
शल्य पर्व
अध्याय २२
८२ क
ततोऽभ्यधावतां
वन पर्व
अध्याय २५५
५५ क
ततोऽभ्यधावतां
शल्य पर्व
अध्याय ९
२२ क
ततोऽभ्यधावत्
वन पर्व
अध्याय २५३
१० क
ततोऽभ्यधावत्पानीय़ं
वन पर्व
अध्याय २९६
३६ ख
ततोऽभ्यधावत्समरे
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
२८ क
ततोऽभ्यधावद्वेगेन
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
३१ क
ततोऽभ्यनुज्ञां
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
१५२ ख
ततोऽभ्यनुज्ञाय़
आदि पर्व
अध्याय १९०
१२ ख
ततोऽभ्यनुज्ञाय़
वन पर्व
अध्याय १५२
२५ क
ततोऽभ्यनुज्ञाय़
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
४० क
ततोऽभ्ययाद्देवराजो
शान्ति पर्व
अध्याय १६७
६ क
ततोऽभ्ययाद्भीमवलो
उद्योग पर्व
अध्याय ७
२१ ख
ततोऽभ्ययान्महारौद्रो
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
१७ क
ततोऽभ्ययान्महावीर्यो
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
११ क
ततोऽभ्ययुर्यामुनमद्रिराजम्
वन पर्व
अध्याय १७४
१५ ख
ततोऽभ्यरोहत्
कर्ण पर्व
अध्याय ५३
१२ ख
ततोऽभ्यवहदव्यग्रो
विराट पर्व
अध्याय ५०
२३ क
ततोऽभ्यविध्यद्वहुभिः
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
५२ क
ततोऽभ्यषिञ्चन्राज्येन
शान्ति पर्व
अध्याय २८३
१८ क
ततोऽभ्यहन्मृगांस्तत्र
वन पर्व
अध्याय २०५
२४ ग
ततोऽभ्यागादथाश्रमम्
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
१ ख