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भवेत्कार्यं
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
११ क
भवेत्कार्यं
कर्ण पर्व
अध्याय २२
२४ ख
भवेत्कार्यं
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
४८ ख
भवेत्कार्यं
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
५३ क
भवेत्कार्यकरं
कर्ण पर्व
अध्याय ६
९ ख
भवेत्कार्यमस्माभिर्भरतर्षभ
शल्य पर्व
अध्याय ३२
५ क
भवेत्कार्यार्थनिर्णय़े
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
७ क
भवेत्कालविशेषेण
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
३३ ख
भवेत्कालविषोपमः
वन पर्व
अध्याय १४२
१४ ख
भवेत्किं
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
२ ख
भवेत्किं
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
४४ ख
भवेत्किञ्चित्केवलं
वन पर्व
अध्याय २०६
१८ ग
भवेत्किञ्चित्तत्त्वं
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
१६ ख
भवेत्किञ्चित्तद्रौक्मं
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
१० ख
भवेत्किञ्चिद्यदि
कर्ण पर्व
अध्याय २४
१५८ क
भवेत्किमत्र
कर्ण पर्व
अध्याय २
९ ख
भवेत्कीर्तिरिह
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
१५ ख
भवेत्कुरुपाण्डूनां
उद्योग पर्व
अध्याय ५
८ ख
भवेत्कृतय़ुगप्राप्तिराशीःकर्मविवर्जितैः
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
५८ ग
भवेत्कृतय़ुगे
शान्ति पर्व
अध्याय ७०
८ क
भवेत्कृष्ण
उद्योग पर्व
अध्याय ८०
१५ ख
भवेत्केन
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
१ ख
भवेत्क्रमः
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
१६ क
भवेत्क्रोधो
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
३१ ख
भवेत्क्षेमी
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
५२ ख
भवेत्तच्च
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
३२ ख
भवेत्ततः
आदि पर्व
अध्याय १६
९ क
भवेत्ततः
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
७४ ख
भवेत्तत्र
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
२४ ख
भवेत्तत्र
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
६ क
भवेत्तत्र
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
१८ ख
भवेत्तत्सुहृद्भिर्निय़ुज्य;
उद्योग पर्व
अध्याय १४६
३४ ख
भवेत्तथा
द्रोण पर्व
अध्याय ६०
३० ख
भवेत्तदा
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
१० क
भवेत्तद्वत्समाचर
द्रोण पर्व
अध्याय १६
४२ ख
भवेत्तद्वदवारणीय़ः
उद्योग पर्व
अध्याय ५१
१८ ख
भवेत्तव
आदि पर्व
अध्याय २२१
१३ ख
भवेत्तव
सभा पर्व
अध्याय २०
२० क
भवेत्तव
वन पर्व
अध्याय १८९
२६ ख
भवेत्तव
स्त्री पर्व
अध्याय ८
१९ ख
भवेत्तव
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
३५ ख
भवेत्तव
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
७ ख
भवेत्तव
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
१२ क
भवेत्तस्मान्नित्यं
वन पर्व
अध्याय २
५८ क
भवेत्तस्मिन्यो
शान्ति पर्व
अध्याय १४५
१८ ग
भवेत्तस्य
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
१९ ख
भवेत्तस्य
शान्ति पर्व
अध्याय ११५
८ ख
भवेत्तस्य
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
३९ क
भवेत्तस्य
शान्ति पर्व
अध्याय ३३२
५ ख
भवेत्तस्यां
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
१३३ ख
भवेत्तस्याः
शान्ति पर्व
अध्याय १४२
४ क
भवेत्तात
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
१६ ख
भवेत्तु
वन पर्व
अध्याय ६९
३० क
भवेत्तु
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
६९ क
भवेत्तु
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
८ ख
भवेत्तुल्यो
वन पर्व
अध्याय ८१
१५७ ख
भवेत्तृप्तिर्मत्स्यैः
अनुशासन पर्व
अध्याय ८८
५ क
भवेत्ते
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
५७ क
भवेत्तेन
वन पर्व
अध्याय ८०
५३ ख
भवेत्तेन
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
२५ क
भवेत्तेषां
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
४६ ख
भवेत्त्यागी
शान्ति पर्व
अध्याय १२
३३ ख
भवेत्त्राणमभिधावेति
वन पर्व
अध्याय २३२
११ क
भवेत्त्र्यहम्
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
७१ ग
भवेत्त्र्यहम्
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
३६ ग
भवेत्त्वत्तः
वन पर्व
अध्याय २९१
१७ क
भवेत्त्वदनन्तरम्
आदि पर्व
अध्याय ६७
१६ ख
भवेत्त्वद्रश्मितापितः
अनुशासन पर्व
अध्याय ९८
१२ ख
भवेत्पण्डितमानी
अनुशासन पर्व
अध्याय ३७
१२ क
भवेत्परमभीप्सतः
शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
२७ ख
भवेत्परे
विराट पर्व
अध्याय ४२
२३ क
भवेत्परैः
उद्योग पर्व
अध्याय ७६
६ ख
भवेत्परैः
उद्योग पर्व
अध्याय ७७
१७ ख
भवेत्पर्णफलान्वितः
आदि पर्व
अध्याय १३८
२५ क
भवेत्पाण्डवानाम्
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
९ क
भवेत्पात्रमथ
अनुशासन पर्व
अध्याय ३७
१ क
भवेत्पापं
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
१३ ख
भवेत्पारमप्लवे
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
३७ क
भवेत्पार्थ
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
८८ क
भवेत्पार्थ
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
२० ख
भवेत्पितुः
वन पर्व
अध्याय २८१
३७ क
भवेत्पुत्रश्चरुर्माता
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
२२ ख
भवेत्पुत्रस्त्यक्तो
अनुशासन पर्व
अध्याय ४९
१३ क
भवेत्पुत्रो
शान्ति पर्व
अध्याय ३१
१९ क
भवेत्पुनः
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
१८ ख
भवेत्पुमान्
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
७० क
भवेत्पूतः
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
२४ ख
भवेत्पूतस्तत्र
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
६० ख
भवेत्पूर्वमस्तेय़मिति
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
३७ ख
भवेत्पौत्रो
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
२५ क
भवेत्प्रदेय़ं
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
३६ ख
भवेत्प्राज्ञ
वन पर्व
अध्याय १९९
१७ क
भवेत्प्राज्ञो
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
१५ क
भवेत्प्राप्तो
वन पर्व
अध्याय ६१
८२ ख
भवेत्पय़;
वन पर्व
अध्याय २८१
३६ क
भवेत्स
वन पर्व
अध्याय २९१
२० ख
भवेत्स
शान्ति पर्व
अध्याय ८८
१० ग
भवेत्स
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
३४ ख
भवेत्स
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
४२ ख
भवेत्स
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
७ ख