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वचनमव्रवीत्
वचनात्तव
वचसा
वचो
वचोऽथ
वज्रधरस्य
वज्रमवासृजत्
वज्राशनिसमस्पर्शान्दीप्तास्यानुरगानिव
वज्रैः
वडाः
वत्स
वत्सोपमन्यो
वदतस्तस्य
वदतो
वदन्ति
वदसि
वदिष्यन्ति
वद्धजाम्वूनदस्रजः
वद्ध्वा
वधः
वधार्थं
वधिष्ये
वधैषिणौ
वध्यतां
वध्यमानमरातिभिः
वध्यमानाः
वध्येत
वनं
वनगोचरः
वनमेव
वनवासाय़
वनाद्वनम्
वने
वने
वने
वनौकसः
वन्धनस्त्वसुरेन्द्राणां
वन्धुविहीनस्य
वपाय़ां
वपुष्मन्त्यो
वभूव
वभूव
वभूव
वभूवात्र
वभूवुर्ग्रथिताः
वभौ
वभ्रुवाहनः
वर
वर
वरं
वरः
वरः
वरः
वरः
वरदानाद्भगवतो
वरम्
वरम्
वरस्त्रिय़म्
वराननाम्
वरारोहे
वरिष्ठ
वरुणः
वरुणेन्दू
वरेण
वर्गा
वर्जय़ित्वा
वर्णसङ्करकारकैः
वर्णान्विश्वासय़ेत्कथम्
वर्ततां
वर्तते
वर्तते
वर्तमानः
वर्तमाने
वर्तमानो
वर्तेत
वर्तय़िष्यामि
वर्धते
वर्धेय़ुरित्यपि
वर्म;
वर्षं
वर्षमैरावतं
वर्षसहस्रिके
वर्षाणि
वर्षे
वरय़ामहे
वलं
वलं
वलं
वलमन्वपद्यन्
वलम्
वलवता
वलवत्संनिकर्षो
वलवन्नादं
वलवान्परपक्षस्तथावलः
वलवृतौ
वला
वलादितः
वलार्थममराधिप
वलिः
वलिनां
वलिर्वैरोचनोऽव्रवीत्
वली
वले
वलेन
वलेषु
वल्मीकं
ववर्ष
ववौ
वशगाः
वशी
वशे
वसता
वसतोऽत्र
वसन्तेऽर्क
वसातिश्चाष्टमः
वसिष्ठमिव
वसु
वसुधा
वसुधाधिपः
वसुन्धराम्
वसुमना
वसूनि
वसेय़ुस्ते
वस्त्ररश्मिधरं
वहतः
वहवः
वहवस्तत्र
वहवो
वहिर्ययौ
वहु
वहुक्षय़म्
वहुधनं
वहुधा
वहुपुष्पफलं
वहुभिर्जोषमास्ते
वहुमानः
वहुरूप्यकृतं
वहुविधं
वहुविस्तरम्
वहुशो
वहुसुवर्णकम्
वहूनि
वहून्यासन्भूतानि
वह्निर्युष्मच्छ्रेय़ो
वह्वीनामुत्तमस्त्रीणां
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वा
वाकेष्वनुवाकेषु
वाक्यं
वाक्यं
वाक्यं
वाक्यमव्रवीत्
वाक्यमाह
वाक्यविदां
वाक्यैः
वाग्दुरुक्तं
वाग्वदति
वाचं
वाचमश्वत्थाम्नासि
वाचा
वाचि
वाच्यमानं;
वाजिनः
वाजिभिः
वाढं
वाणप्रिय़हितैषिणम्
वाणा
वाणिज
वाणैः
वाणौघैः
वाताः
वातोऽतिमात्रं
वादिनः
वाध्यते
वानरर्षभलक्षणम्
वान्धवा
वान्धवो
वापि
वापि
वाप्यसद्वृत्तः
वामनं
वारणं
वारणेनेव
वारिणा
वारुणश्च
वार्यमाणस्तय़ा
वार्ष्णेय़
वार्ष्णेय़ी
वारय़ामास
वालः
वालवच्च
वाला
वालिमार्गेण
वालो
वाशन्त्यस्तीव्रशोकसमन्विताः
वाष्पशोकसमन्वितम्
वासव
वासवम्
वासवोपम
वासांस्यादुधुवुश्च
वासुदेव
वासुदेवः
वासुदेवश्चिकीर्षति
वासुदेवस्य
वासुदेवेऽप्रमेय़े;
वासोभिर्नाश्वदानेन
वाहनानि
वाहान्विव्याध
वाहिनीम्
वाहुकं
वाहुभ्यां
वाहुवीर्यार्जितां
वाहूंश्चिच्छेद
वाह्लिकः
वाह्लीकास्तेषां
वाय़व्यं
वाय़ुः
वाय़ुभक्षोऽभूत्संवत्सरमतन्द्रितः
वाय़ुर्मघवानश्विनौ
वाय़ुस्तमुपसेवते
विंशतिराहताक्षौहिणीनां;
विकत्थसे;
विकर्णो
विकारं
विकुर्वाणं
विकृष्यमाणा
विक्रमश्चैव
विक्रम्य
विक्रान्ते
विक्रय़ं
विख्यातं
विगतकल्मषः
विगर्हमाणः
विग्रहः
विघ्नकरो
विचरत्यसमुन्नद्धो
विचलितुं
विचारय़ेत्
विचित्रवीर्यस्य
विचित्रेण
विचिन्वीत
विचेरुश्च
विजहार
विजानामि
विजिग्ये
विजित्य
विजेष्यामि
विज्ञानात्सम्वोधाद्वुद्धिरुच्यते
विज्ञाय़ेदं
विजय़ं
विजय़ावहम्
विजय़े
वितण्डालापसंलापैर्हुतय़ाचितवन्दितैः
वितानाः;
वित्तकामुक
वित्रासं
विदर्शय़न्
विदितं
विदितार्था
विदित्वा
विदुः
विदुः
विदुरं
विदुरस्मारमोहितः
विदुरेणेह
विदुर्वुधाः
विदेहावकरोत्पार्थ
विद्धि
विद्धि
विद्धो
विद्ध्वा
विद्मस्त्वां
विद्यते
विद्यते
विद्यते
विद्यया
विद्यातपोय़ोनिरय़ोनिर्विष्णुरीडितः
विद्यामहं
विद्युज्जिह्वा
विद्रवद्भिश्च
विद्वद्भिः
विद्वान्
विधत्स्वैषां
विधानं
विधिं;
विधिना
विधिप्रय़ुक्तां
विधिवत्तदा
विधिवद्धौम्यस्तेषां
विधीय़ते
विधुन्वानं
विध्यन्तश्च
विनदन्तः
विनश्यति
विनष्टे
विनाश
विनाशाय़
विनिःश्वस्य
विनिघ्नन्रथिनां
विनिर्दग्धस्तेजसा
विनिविष्टानि
विनिश्चय़म्
विनिहत्यौघराक्षसं;
विनेदुर्भिन्नमर्माणो
विन्दति
विन्दुसरः
विनय़े
विपरीतमथापरम्
विपाठा
विपुलं
विपुला
विप्र
विप्र
विप्रः;
विप्रथय़ंस्तव
विप्रर्षिपितृदेवताः
विप्रवाक्याभिचोदितः
विप्रा
विप्राणां
विप्रिय़कारिणीम्
विप्रेषु
विप्रोऽय़ं
विभर्ति
विभावसुर्भावय़तेऽमितौजाः
विभीषणः
विभुम्
विभेद
विभो
विभो
विभ्रतो
विमनसं
विमलं
विमलो
विमाने
विमुक्तरागो;
विमुखान्योधान्धृष्टद्युम्नं
विमुञ्चताम्
विमृशन्तमधोमुखम्
विरक्ताश्च
विरथं
विरराम
विराटं
विराटमव्रवीत्
विराटे
विरुवन्तो
विरोधः
विलप्य
विलोक्य
विवदमानानां
विवर्णं
विवर्धिताः
विवादे;
विविंशतिः
विविधं
विविधाकारं
विविधानि
विविधान्युत
विविधैरपि
विविशुर्जातवेदसम्
विवुधास्तान्हन्तुं
विवेकश्चोपजाय़ते
विव्यथे
विव्याध
विव्याध
विव्याध
विव्रुवन्त्यार्यसत्त्वा
विशसने
विशां
विशां
विशां
विशां
विशां
विशालपुरमालिनीम्
विशिखैर्वहुभिस्तिग्मतेजनैः
विशिष्टात्मा
विशीर्णमिव
विशुद्धय़ा
विशेषतः
विशेषप्रतिशाखवान्
विशेषो
विश्रमस्व
विश्रुतः
विश्रुता
विश्वकर्मा
विश्वरूपः;
विश्वस्ता
विश्वामित्रस्तु
विश्वावसुश्चित्रसेनस्तथान्ये
विश्वे
विषण्णभूय़िष्ठरथा
विषमागतैः
विषह्यं
विषादोऽभिभवति
विष्टरोत्तरे
विष्णुना
विष्णुर्व्रह्मा
विष्यन्दमानेन
विषय़ा
विषय़े
विसर्गं
विसस्तैन्यं
विसृजामि
विसे
विस्तरेणेतरेण
विस्फारय़न्तश्चापानि
विस्मिताः
विस्मय़ः
विहगाश्च
विहरिष्याम्यहं
विहाय़सा
विहिता
विहीनस्य
विय़ति
वीक्षां
वीजाद्वीजं
वीतरागो
वीभत्सुपालिताः
वीभत्सोराशु
वीर
वीर
वीरं
वीरः
वीरणो
वीरश्च
वीरस्य
वीरा;
वीराः;
वीरास्तद्वचः
वीरेण
वीरो
वीरौ
वीर्यं
वीर्यवानभिजाय़ते
वीर्यवान्
वीर्यवान्
वीर्यसंमतौ
वुञ्जते
वुद्धिं
वुद्धिः
वुद्धिमन्तो
वुद्धिमास्थाय़
वुद्धिरेव
वुद्धिर्वुद्धिमतोत्सृष्टा
वुद्धिस्तत्र
वुद्ध्या
वुद्ध्या
वुधः
वुध्यते
वुभुक्षितस्य
वृंहय़ते
वृकोदरः
वृकोदरः
वृकोदरेण
वृक्षांश्चावस्थितान्पश्य
वृजिनं
वृणोम्यहम्
वृतः
वृतो
वृत्तं
वृत्तानि
वृत्तिक्षीणाय़
वृत्तिहीनस्य
वृत्त्युपाय़फलानि
वृत्रसङ्काशं
वृथा
वृद्धं
वृद्धवालस्य
वृद्धाः
वृद्धिका
वृद्धौ
वृषध्वज
वृषभौ
वृषस्तदा
वृष्णिकलत्राणां
वृष्णिवीरेऽपि
वृष्ण्यन्धकाश्चैव
वृहत्सेने
वृहद्वादी
वृहस्पतिः
वृहस्पतिश्चेद्याजय़ेत्त्वां
वेगं
वेगात्कङ्कवर्हिणवाससः
वेगेन
वेणिकाः
वेत्ति
वेत्थ
वेद
वेद
वेदनिश्चय़ात्
वेदवादे
वेदवेदाङ्गपारगः
वेदा
वेदात्मा
वेदान्तेषु
वेदितव्यं
वेदे
वेद्धारमिमं
वेधसे
वेलेव
वेश्मानि
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वै
वैकर्तनः
वैखानसमरीचिपाः
वैणवी
वैदिकानि
वैद्येषु
वैरं
वैराग्येण
वैवर्ण्यं
वैशसं
वैश्यशूद्रौपय़िकीः
वैश्यो
वैश्वानरमुखे
वो
वो
वोद्धव्यौ
व्यकिरन्त
व्यक्तस्थमव्यक्तं
व्यचरत्सङ्ख्ये
व्यञ्जनकारमुत्तमम्
व्यतिष्ठत
व्यथते
व्यथिताः
व्यदृश्यत
व्यधमच्छरसम्पातैः
व्यनश्यत्
व्यपाश्रय़ः
व्यभिचारात्तु
व्यराजन्त
व्यवधातव्यं
व्यवसिता
व्यवस्थितम्
व्यवस्यति
व्यवाय़ं
व्यसनं
व्यसनोदय़ाः
व्यहनत्कार्मुकं
व्याख्यातुमर्हसि
व्याघ्रा
व्यादितास्यः
व्याधिव्यसनसञ्चरम्
व्याप्तमन्तर्भूतेन
व्यालो
व्यासशिष्यः
व्यासो
व्याय़ामः
व्युष्टिं
व्यूहं
व्यूहेषु
व्योम्न्यदृश्यत
व्रजन्नेव
व्रतं
व्रतम्
व्रवीतु
व्रवीम्युत्तरे
व्रह्म
व्रह्म
व्रह्मगर्भो
व्रह्मचर्येण
व्रह्मचारी
व्रह्मणः
व्रह्मणे
व्रह्मण्येषा
व्रह्मन्कथं
व्रह्मन्नय़जं
व्रह्मपूर्वं
व्रह्मर्षिभिः
व्रह्मलोकं
व्रह्मवादि;
व्रह्मविदां
व्रह्महत्यया
व्रह्मा
व्रह्माण
व्रह्मार्पणं
व्रह्मय़ोनिस्थास्ते
व्राह्मणं
व्राह्मणः
व्राह्मणच्छद्मिने
व्राह्मणव्रुवाः
व्राह्मणस्य
व्राह्मणा
व्राह्मणा
व्राह्मणाः
व्राह्मणानां
व्राह्मणान्क्षत्रिय़ांश्चैव
व्राह्मणाश्च
व्राह्मणीं
व्राह्मणेभ्यस्ते
व्राह्मणैः
व्राह्मणो
व्राह्मणोऽव्रवीत्
व्राह्मान्नाराय़णादैन्द्रादाग्नेय़ादपि
व्रीडय़ान्वितः
व्रुवन्
व्रुवाणं
व्रूहि
व्रूहि
व्रूहि
व्रूय़ात्तत्कार्यमविचारय़द्भिरिति
वय़ं
वय़ं
वय़ं
वय़ं
वय़म्
वय़म्
वय़ो
वहुशो
वन पर्व
अध्याय २६३
४ ख
visibility
वहुशो
वन पर्व
अध्याय २८९
६ क
visibility
वहुशो
उद्योग पर्व
अध्याय ९८
८ क
visibility
वहुशो
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
२४ ख
visibility
वहुशो
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
२५ क
visibility
वहुशो
उद्योग पर्व
अध्याय १७९
१२ क
visibility
वहुशो
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
४० क
visibility
वहुशो
भीष्म पर्व
अध्याय ११७
११ ख
visibility
वहुशो
द्रोण पर्व
अध्याय ७
१९ क
visibility
वहुशो
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
२२ क
visibility
वहुशो
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
३८ क
visibility
वहुशो
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
६ क
visibility
वहुशो
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
१२ ख
visibility
वहुशो
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
१५ क
visibility
वहुशो
कर्ण पर्व
अध्याय ४
२२ क
visibility
वहुशो
कर्ण पर्व
अध्याय २४
१४० क
visibility
वहुशो
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
११७ ख
visibility
वहुशो
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
३४ क
visibility
वहुशो
शल्य पर्व
अध्याय २
२८ क
visibility
वहुशो
शल्य पर्व
अध्याय १०
१६ ख
visibility
वहुशो
शल्य पर्व
अध्याय ३६
३३ क
visibility
वहुशो
शल्य पर्व
अध्याय ५८
१४ ख
visibility
वहुशो
शल्य पर्व
अध्याय ६०
२० क
visibility
वहुशो
शल्य पर्व
अध्याय ६४
५ क
visibility
वहुशो
स्त्री पर्व
अध्याय ६
११ क
visibility
वहुशो
शान्ति पर्व
अध्याय १५०
२६ क
visibility
वहुशो
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
३७ ग
visibility
वहुशो
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
४३ क
visibility
वहुशो
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २६
९ क
visibility
वहुशोकं
स्त्री पर्व
अध्याय १
२१ क
visibility
वहुशोजलाम्
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
४१ क
visibility
वहुशोऽकथय़त्प्रभुः
कर्ण पर्व
अध्याय २४
१४१ क
visibility
वहुशोऽतिप्रय़त्नेन
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
११ ख
visibility
वहुशोऽन्विष्टा
विराट पर्व
अध्याय २४
१३ क
visibility
वहुश्रुतं
वन पर्व
अध्याय २७
१९ ख
visibility
वहुश्रुतं
उद्योग पर्व
अध्याय २६
१२ क
visibility
वहुश्रुतः
सभा पर्व
अध्याय ५
२९ क
visibility
वहुश्रुतः
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
१८ क
visibility
वहुश्रुतः
उद्योग पर्व
अध्याय ५२
११ क
visibility
वहुश्रुतः
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
४१ क
visibility
वहुश्रुतः
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
२५ क
visibility
वहुश्रुतः
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
३६ क
visibility
वहुश्रुतः
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
६ ख
visibility
वहुश्रुतः
अनुशासन पर्व
अध्याय १२२
१ ख
visibility
वहुश्रुतम्
शान्ति पर्व
अध्याय ८७
२७ क
visibility
वहुश्रुतम्
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
६ क
visibility
वहुश्रुतम्
शान्ति पर्व
अध्याय २१५
४ क
visibility
वहुश्रुतश्चैत्रकथः
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
१३ क
visibility
वहुश्रुतस्य;
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
१९ क
visibility
वहुश्रुता
उद्योग पर्व
अध्याय १३१
३ ख
visibility
वहुश्रुता
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
३० ख
visibility
वहुश्रुताः
आदि पर्व
अध्याय १
४२ क
visibility
वहुश्रुताः
आदि पर्व
अध्याय ८९
८ ख
visibility
वहुश्रुताः
सभा पर्व
अध्याय ८
२५ क
visibility
वहुश्रुताः
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
९२ क
visibility
वहुश्रुताः
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
६६ क
visibility
वहुश्रुताः
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
२९ ख
visibility
वहुश्रुताः
शान्ति पर्व
अध्याय १९
२४ ख
visibility
वहुश्रुताः
शान्ति पर्व
अध्याय २५
१७ क
visibility
वहुश्रुताः
शान्ति पर्व
अध्याय २८
३१ ख
visibility
वहुश्रुताः
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
५ क
visibility
वहुश्रुताः
शान्ति पर्व
अध्याय ८७
१७ क
visibility
वहुश्रुताः
शान्ति पर्व
अध्याय १५२
१५ क
visibility
वहुश्रुताः
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
२१ क
visibility
वहुश्रुताः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
५७ क
visibility
वहुश्रुतानां
उद्योग पर्व
अध्याय १२१
२२ क
visibility
वहुश्रुतान्
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
२ क
visibility
वहुश्रुतान्
अनुशासन पर्व
अध्याय ३३
३ क
visibility
वहुश्रुताश्च
उद्योग पर्व
अध्याय ३६
२२ क
visibility
वहुश्रुताय़
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
३४ क
visibility
वहुश्रुतो
उद्योग पर्व
अध्याय ३०
१४ क
visibility
वहुश्रुतो
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
१० ख
visibility
वहुश्रुतो
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
४० ख
visibility
वहुश्रुतौ
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
११ क
visibility
वहुश्रुत्या
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
४ क
visibility
वहुषु
शल्य पर्व
अध्याय २२
८० क
visibility
वहुसंरव्धौ
विराट पर्व
अध्याय ३१
१५ ग
visibility
वहुसंवृते
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
५९ ख
visibility
वहुसंसारय़ोनिषु
शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
२६ क
visibility
वहुसङ्ग्रामकर्शितम्
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८८
७ ख
visibility
वहुसङ्ग्रामकर्शितम्
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८८
९ ख
visibility
वहुसत्त्वगणालय़ः
कर्ण पर्व
अध्याय २८
४१ क
visibility
वहुसर्पसरीसृपम्
शान्ति पर्व
अध्याय २८९
५१ क
visibility
वहुसामय़ुक्तम्
उद्योग पर्व
अध्याय २
१२ क
visibility
वहुसाहस्रमद्भुतम्
कर्ण पर्व
अध्याय ४
२० क
visibility
वहुसाहस्रमेति
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
३६ क
visibility
वहुसाहस्रा
सभा पर्व
अध्याय ४९
३ ख
visibility
वहुसाहस्रा
वन पर्व
अध्याय २२८
२६ ख
visibility
वहुसाहस्रा
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
२२ क
visibility
वहुसाहस्रा
उद्योग पर्व
अध्याय १६७
६ क
visibility
वहुसाहस्राः
वन पर्व
अध्याय २३०
३० ख
visibility
वहुसाहस्राः
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
४ ख
visibility
वहुसाहस्राः
कर्ण पर्व
अध्याय ४
३८ ख
visibility
वहुसाहस्राः
शल्य पर्व
अध्याय २
१८ क
visibility
वहुसाहस्राः
शल्य पर्व
अध्याय २
३६ ख
visibility
वहुसाहस्रान्दिव्यैरस्त्रैर्महावलः
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
१५ क
visibility
वहुसाहस्रान्योधान्युद्धविशारदः
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
४९ ख
visibility
वहुसाहस्रैर्वलैर्गोवासनो
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
१२ ख
visibility
वहुसुवर्णं
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
१० ग
visibility
वहुसुवर्णकः
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
१३ ख
visibility