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तस्मात्प्रशममिच्छसि
उद्योग पर्व
अध्याय ७३
१८ ख
तस्मात्प्रसादं
वन पर्व
अध्याय १२५
६ ग
तस्मात्प्रसादं
कर्ण पर्व
अध्याय २९
३५ ख
तस्मात्प्रसूतमव्यक्तं
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
२५ क
तस्मात्प्रसूतो
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
३७ क
तस्मात्प्रहेष्याम्यद्य
आदि पर्व
अध्याय १११
३२ क
तस्मात्प्राग्ज्योतिषं
द्रोण पर्व
अध्याय २८
३३ क
तस्मात्प्राज्ञेन
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
६८ क
तस्मात्प्राज्ञैश्च
वन पर्व
अध्याय १
२४ क
तस्मात्प्राज्ञो
शान्ति पर्व
अध्याय ११५
१३ क
तस्मात्प्राणभृतः
आदि पर्व
अध्याय ११
१२ ख
तस्मात्प्राणान्धारय़िष्ये
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
९८ ग
तस्मात्प्राणिषु
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
३१ ख
तस्मात्प्रातिष्ठद्भीष्मः
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
२३ ख
तस्मात्प्राप्नुहि
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
२९ ख
तस्मात्प्राप्यैव
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
१२ ग
तस्मात्प्राय़मुपासिष्ये
वन पर्व
अध्याय २३८
१९ क
तस्मात्प्रेष्यत्यपानताम्
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २१
७ क
तस्मात्प्रय़च्छ
अनुशासन पर्व
अध्याय ९८
१७ क
तस्मात्फलाद्विनिष्क्रम्य
आदि पर्व
अध्याय ३९
३३ ख
तस्मात्स
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
६४ ख
तस्मात्स
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
२८ ख
तस्मात्स
अनुशासन पर्व
अध्याय ७९
४ ख
तस्मात्संरक्षता
शान्ति पर्व
अध्याय १२८
२७ ख
तस्मात्संशाम्य
शल्य पर्व
अध्याय ५९
२० ख
तस्मात्संश्रावय़ामि
उद्योग पर्व
अध्याय १८
१७ क
तस्मात्संशय़ितेऽप्यर्थे
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
८० क
तस्मात्संस्तम्भय़ात्मानं
शान्ति पर्व
अध्याय ३४
२१ क
तस्मात्संहर
सौप्तिक पर्व
अध्याय १५
२५ ख
तस्मात्संहर
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
१९ ख
तस्मात्संय़च्छ
स्त्री पर्व
अध्याय १२
७ ख
तस्मात्सकृदिदानीं
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
४६ ख
तस्मात्सक्तून्ग्रहीष्यामि
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
५४ क
तस्मात्सङ्कीर्णवृत्तेषु
आदि पर्व
अध्याय ७४
९ ख
तस्मात्सङ्घातमेवाहुर्गणानां
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
३१ ख
तस्मात्सङ्घातय़ोगेषु
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
१४ ख
तस्मात्सञ्जनय़ेत्कोशं
शान्ति पर्व
अध्याय १३१
२ क
तस्मात्सतां
उद्योग पर्व
अध्याय १०
२३ ख
तस्मात्सत्यं
सभा पर्व
अध्याय ६१
६८ ख
तस्मात्सत्यं
सभा पर्व
अध्याय ६१
७६ ख
तस्मात्सत्यं
वन पर्व
अध्याय २८२
३५ क
तस्मात्सत्यं
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
२४ ख
तस्मात्सत्यं
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
३१ ख
तस्मात्सत्यव्रताचारः
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
२७ क
तस्मात्सत्याश्रय़ा
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३५
२५ क
तस्मात्सत्रं
विराट पर्व
अध्याय २८
५ क
तस्मात्सत्सु
वन पर्व
अध्याय २८१
४१ ख
तस्मात्सत्सु
वन पर्व
अध्याय २८१
४२ ख
तस्मात्सत्स्वपि
सभा पर्व
अध्याय ३५
११ क
तस्मात्सद्भिर्न
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
६४ क
तस्मात्सनत्कुमारत्वं
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
३५ ख
तस्मात्सन्तं
उद्योग पर्व
अध्याय १०
२४ ख
तस्मात्सन्तापं
आदि पर्व
अध्याय ८४
११ ख
तस्मात्सन्तो
वन पर्व
अध्याय २८१
२३ ख
तस्मात्सन्तो
वन पर्व
अध्याय २८१
२४ ख
तस्मात्सन्तो
वन पर्व
अध्याय २८१
४९ ख
तस्मात्सन्तोषमेवेह
वन पर्व
अध्याय २
४५ क
तस्मात्सन्तोषमेवेह
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
२१ ख
तस्मात्सप्तसु
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
७ ग
तस्मात्समर्थोऽस्मि
उद्योग पर्व
अध्याय ६१
४ ख
तस्मात्समाचर
शल्य पर्व
अध्याय ३०
१४ ख
तस्मात्समाहितं
शान्ति पर्व
अध्याय २०८
८ क
तस्मात्समीक्षय़ैव
शान्ति पर्व
अध्याय १४८
५ ख
तस्मात्समुत्पन्नस्तन्निष्ठस्तदुपाश्रय़ः
शान्ति पर्व
अध्याय १०
१९ क
तस्मात्समुद्रा
उद्योग पर्व
अध्याय ४५
४ ख
तस्मात्सम्पश्यतस्तस्य
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
६ क
तस्मात्सम्यक्परीक्षेत
शान्ति पर्व
अध्याय २०५
१८ क
तस्मात्सम्यक्प्रधारय़ेत्
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
१० ग
तस्मात्सर्पं
अनुशासन पर्व
अध्याय १
२४ ख
तस्मात्सर्वं
शान्ति पर्व
अध्याय २०
१० ख
तस्मात्सर्वगतं
भीष्म पर्व
अध्याय २५
१५ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
७ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
९ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
११ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
१२ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
१५ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
१६ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
१९ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
२० ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
२१ ख
तस्मात्सर्वत्र
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
२२ ख
तस्मात्सर्वप्रदानेभ्यस्तिलदानं
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
१० ख
तस्मात्सर्वप्रय़त्नेन
अनुशासन पर्व
अध्याय ८७
५ ख
तस्मात्सर्वप्रय़त्नेन
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
३३ क
तस्मात्सर्वसमारम्भो
शान्ति पर्व
अध्याय ८९
९ क
तस्मात्सर्वाः
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
१४ क
तस्मात्सर्वाणि
भीष्म पर्व
अध्याय २४
३० ख
तस्मात्सर्वाणि
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
१०५ ख
तस्मात्सर्वाणि
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
१४३ ख
तस्मात्सर्वाणि
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
८ ख
तस्मात्सर्वाणि
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
२० ग
तस्मात्सर्वाणि
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
३४ ख
तस्मात्सर्वानुपासङ्गान्सर्वोपकरणानि
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
४६ क
तस्मात्सर्वान्तको
वन पर्व
अध्याय १८६
७ क
तस्मात्सर्वान्ददाम्यद्य
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
१७६ ख
तस्मात्सर्वासु
शान्ति पर्व
अध्याय १०१
१२ ख
तस्मात्सर्वास्ववस्थासु
शान्ति पर्व
अध्याय १००
१७ ख
तस्मात्सर्वास्ववस्थासु
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
१८६ क
तस्मात्सर्वास्ववस्थासु
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
८४ क
तस्मात्सर्वे
आदि पर्व
अध्याय ३
२६ ख